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| 12.28.2008 |
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माना कड़ी धूप है फिर भी, मन ऐसा घबराया क्या? |
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माना कड़ी धूप है फिर भी, मन ऐसा घबराया क्या? सुना है उसके घर पर कोई साहित्यिक आयोजन है; बच्चा एक तुम्हारे घर भी कचरा लेने आता है; बिटिया है बीमार गाँव में, लिक्खा है-घर आ जाओ; ऐसे गुमसुम क्यों बैठे हो! आओ, हमसे बात करो। |
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