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| 12.28.2008 |
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अबकी बार दिवाली में जब घर आएँगे मेरे पापा |
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अबकी बार दिवाली में जब घर आएँगे मेरे पापा दादी का टूटा चश्मा और फटा हुआ चुन्नू का जूता, अम्मा की धोती तो अभी नई है; होली पर आई थी; जिज्जी के चेहरे की छोड़ो, उसकी आँखें तक पीली हैं; बड़की हुई सयानी, उसकी शादी का क्या सोच रहे हो? बौहरे जी के अभी सात सौ रुपये देने को बाकी हैं; |
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