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| 07.19.2008 |
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सच क्या था - एक सार्थक कृति |
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पुस्तक -
सच क्या
था समीक्षक - डॉ. अमिता दुबे, सहायक सम्पादक,
उत्तर
प्रदेश हिन्दी संस्थान
विधा :
कहानी
मनसा
पब्लिकेशन
2-256विराम
खण्ड
कृतिकार :
अलका प्रमोद,
गोमती नगर,
लखनऊ
प्रकाशन
वर्ष
:2005
मूल्य : रु.
150
मात्र
“सच
क्या था’’
लोकiप्रय
कहानीकार अलका प्रमोद की सशक्त परिपक्व और सामाजिक,
12
कहानियों का संग्रहणीय संकलन है। इन कहानियों में,
समाज में नित्य प्रति घटने वाली घटनाओं,
समस्याओं को कहानी के पात्रों के माध्यम से इस सफलता से प्रस्तुत किया गया
है कि कहानी पढ़ते पढ़ते प्राय: पात्रों में किसी आस पास के परिचित का
चेहरा उभर आता है। कहानियों में पात्रों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण तो किया
ही गया है,
समस्याओं को उठाने के साथ ही उनका समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास भी किया
गया है। कहानियों में तारतम्यता और उन्हें एक बार प्रारम्भ करने पर उन्हे
समाप्त करने की उत्कंठा इनकी विशेषता है।
किसी लेखक के सामाजिक दायित्व की दृष्टि से देशें तो लेखिका इस
दायित्व को वहन करने में पूर्णत: सफल रही हैं।
संकलन की
प्रथम कहानी
“मूल्यांकन’’
आज
के युग की कैरियर के प्रति समर्पित,
परन्तु परिवार को प्राथमिकता देने वाली पत्नी के मूल्यांकन पर प्रश्न चिन्ह
लगाती है। विडंबना यह कि
मूल्यांकन कोई और नहीं उसका प्रेमी पति करता है,
जो
उसके प्रति आकiर्षत
ही उसकी प्रतिभा को देख कर हुआ था।
कहानी का ताना बाना रुचिकर और सहज है।
“और
बादल छंट गए’’
एक
संवेदनशील कहानी है। जिसमें पति पत्नी का द्वन्द्व और पालित पिता और
जन्मदाता पिता के मध्य पुत्री द्वारा पिता के चयन की परिiस्थति
आ पड़ने पर पुत्री क्या करती है,
का
प्रस्तुतिकरण,
रोचक और संदेश पूर्ण
है। पति पत्नी के द्वन्द्व के संदर्भ में
“ -
- -
- -
विवाह के
बाद दोनों को अनुभव हुआ कि वह दोनों झरने की उन दो धाराओं के समान हैं,जो
विपरीत ढलानों पर गिरती हैं और उनके मध्य इतनी विशाल चट्टान है जिसे काट कर
दोनों को समाहित करना असंभव नहीं तो दुष्कर अव्य है -
- -
“एक
दूसरे के विरुद्ध पति पत्नी की परिiस्थति
को,
मात्र एक पंक्ति में लेखिका ने सशक्त ढंग से व्यक्त किया है। कहानी में
अन्त तक कौतूहल बना रहता है।
“मृगतृष्णा”
एक
अच्छी शिक्षा प्रद कहानी है।
मर्यदाओं को भूल कर निजी सुख के लिये भटकने वाली स्त्री कहीं की नहीं रहती
यही इस कहानी का मूलमंत्र है। यह रचना घर की दहलीज को लाँघने वाली नारियों
को अपने फैसले पर पुनiर्वचार
करने का संदेश देती है।
“बसन्त
आ ही गया
“
जहाँ एक
ओर एक परिपक्व स्त्री की कहानी है
वही आज की तथा कiथत
सोशली माडन्¥
युवा पीढ़ी पर व्यंग्य है। जो
अपने संदर्भ में तो उदार विचारों की समर्थक है पर बुआ के संदर्भ में उसकी
उदारता हवा हो जाती है,
तब
उसे
‘समाज
और फ्रैंडस क्या कहेंगे’
की
चिन्ता हो जाती है।
‘दंश’
कहानी संग्रह की एक मार्मिक कहानी है,
जिसमे एक माँ अपने बच्चों के भविष्य के लिये अपना जीवन दाँव पर लगा देती
है। कैंसर जैसे दुर्साध्य रोग से,
वह
सभी से यह बात छिपाते हुए अकेली ही लड़ती है। वह तो अपने परिवार के लिये
जान दे देती है पर उसकी चिकित्सक जिसने उसके हठ के कारण उसके रोग को गुप्त
तो रखा पर कर्तव्य न निभाने का अपराध बोध उसे दंश देता रहता है।
‘एक
और हार’
कहानी युद्ध से घायल हो कर लौटे सैनिक की कुंठा और उसके प्रति लोगों के
व्यवहार को दर्शाती है। जो सैनिक
युद्ध में शहीद हो गया उसके प्रति तो लोगों के नजरिये में मान है पर
जिसने अपने अंग देश को समर्पित कर दिये उसके प्रति उपेक्षा क्यों?
उसका मूल्यांकन भी कम नहीं होता,
इसी प्रश्न को कहानी में उठाया गया है।
‘काली
कलूटी’
कहानी इस ओर इशारा करती है कि किसी क्षण किशोरावस्था में कही कोई कटु
बात मन को कहाँ तक प्रभावित करती है और कभी कभी इतना कुंठित कर देती है कि
जीवन भर वह दंश चुभता है,
बाद में
उसी व्यक्ति द्वारा ही उसे दंश से छुटकारा मिलता है।
‘उसके
आने के बाद’
एक
सास के बहू के आने के बाद स्वयं उपेक्षित अनुभव करने के मनोविज्ञान को बड़े
स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया है।
‘त्रिशंकु’
यदि एक झोपड़ी में रहने वाली लड़की के सपनों की कहानी है तो
‘क्या
सुखी लौटेगी’
पति से उपेक्षित पत्नी के अन्य पुरुष की ओर आकiर्षत
होने का विषय उठाया गया है।
कहानी
संग्रह की अंतिम कहानी
‘सच
क्या था’
एक
सशक्त कहानी है यह कहानी समाज में बेरोजगारी की समस्या पर करारा व्यंग्य है,
जिसमें इस समस्या से जूझता पुत्र पिता के बीमार होने पर यहाँ तक सोच लेता
है कि यदि वह उन्हें दवा न दे तो उनकी मत्यु हो जाये तो उसे नौकरी मिल सकती
है। इस कहानी में पुत्र के
मन में उठ रही दुविधा कि,
‘पिता
और आने वाली सन्तति में किसे बचाए’
का
वर्णन बहुत सजीव बन पड़ा है। इस कहानी में उठायी गई समस्या और परिiस्थतियाँ
मन को झझकोर देती हैं।
कुल मिला कर संग्रह की सभी कहानियाँ किसी न किसी समस्या को उठाते हुए उसका समाधान प्रस्तुत करती हैं। आकर्षक आवरण पृष्ठ, और सुरुचि पूर्ण कथानक के कारण संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है। कहानी संग्रह का लोकार्पण सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष उत्तर प्रदेश, के कर कमलों से होने एवं उनके द्वारा प्रस्तुत सागर्भित चर्चा ने साहित्यानुरागियों को कृति के प्रति और भी आकर्षित किया है। |
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