झलक अली सरदार जाफ़री
सिर्फ़ लहरा के रह गया आँचल रंग बन कर बिखर गया कोई
गर्दिश-ए-ख़ूं रगों में तेज़ हुई दिल को छू कर गुज़र गया कोई गर्दिश-ए-ख़ूं=रुधिर का बहाव; रग=नाड़ी
फूल से खिल गये तसव्वुर में दामन-ए-शौक़ भर गया कोई तसव्वुर=कल्पना,विचार; दामन-ए-शौक़=प्रेम की झोली