मातृत्व आकांक्षा यादव
उसके आने के अहसास से सिहर उठती हूँ अपने अंश का एक नए रूप में प्रादुर्भाव पता नहीं क्या-क्या सोच पुलकित हो उठती हूँ उसकी हर हलचल भर देती है उमंग मुझमें बुनने लगी हूँ अभी से उसकी ज़िन्दगी का ताना-बाना शायद मातृत्व का अहसास है।