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ISSN 2292-9754

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04.25.2015


रिश्ते

रिश्ते तल्ख़ इतने हो न जाएँ,
जिगर को फूँकें, ज़ुबान जलाएँ।
ये धार शब्दों की काटती है,
भाई से भाई, बेटों से माएँ |1|

है बात कुछ जो, चुभी है गहरी,
मगर पीर दिल की, किसे सुनाएँ।
यहाँ सारे चेहरे, हैं अजनबी से,
कुछ किससे पूछें, किसे बताएँ |2|

लगी थी ठोकर, सँभल गया पर,
थी मेरे पीछे, बड़ी दुआएँ।
दूर होकर भी, करीब रहना,
अजनबी लगें न, नज़र जब मिलाएँ |3|

बहुत से क़िस्से हैं खट्टे मीठे,
कभी हँसाएँ, कभी रुलाएँ।
बड़ा ही मुश्किल ये फ़ैसला है
किसे याद रखें, किसे भुलाएँ |4|

मिट्टी है घर की, अलग महक है,
अलग है रंगत, अलग हवाएँ।
अलग सा चैन-ओ-अमन यहाँ है,
इस शहर की हैं अलग अदाएँ |5|


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