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09.27.2007
 
मेरी दुनियाँ
अजन्ता शर्मा

ये ख़्वाबों ख्यालों विचारों की दुनियाँ
मन को दुखाते कुछ सवालों की दुनियाँ

उस कोने पड़ी एक शराब की बोतल
इस कोने पड़ी खाली थालों की दुनियाँ

दौड़ते औ भागते रास्तों का फन्दा
या तन्हा सिसकती राहों की दुनियाँ

तू कौन क्या तेरा क्या उसका क्या मेरा
कुछ बनते बिगड़ते सहारॊं की दुनियाँ

एक कमरे ्में पलते सपनों की दुनियाँ
एक कमरे में ख़्वाब के मज़ारों की दुनियाँ


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