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| 07.06.2007 |
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घर
में
तलाश
कर
लिये
मौके
शिकार
के अहमद रईस निज़ामी |
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घर
में
तलाश
कर
लिये
मौके
शिकार
के लगता
है
उसकी
दाल
में
काला
जुरूर
है इस
ज़िन्दगी
में
कद्र
न
की
आपने
मेरी पगड़ी,
कुलाह
और
ये
दस्तार
ही
नहीं उनको
मेरी
मुक्ति
की
दुआ
भी
न
रही
याद |
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