अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
04.28.2007
 

जाने वाले
डॉ. (श्रीमती) एग्नेस ठाकुर


 

यादों के दीप जलाकर
   दर्द की दुनिया बसाकर,
      खुशियों क जहाँ तो -
        क्यों चले जाते हैं
          ये जाने वाले!
            ये जाने वाले!

गीतों की सरगम सुनकर
   भावों के पंचम सजाकर
      प्यार की लय अधूरी -
         क्यों छोड़ जाते हैं,
            ये जाने वाले!

खुशियों का राज़ बताकर
   उदासियों को हँसी सिखाकर,
       होठों की फिर हँसी चुराकर -
         क्यों रूठ जाते हैं
             ये जाने वाले!

सोयी उमंगों को जगाकर
   दिल की धड़कनओं को उलझाकर,
       जाकर उस पार फिर -
         क्यों नहीं आते हैं
            ये जाने वाले!

यादों के बादल बनकर,
    हृदय-भूमि पर बरसकर
       सूखे ज़ख़्मों को हरा -
          क्यों कर जाते हैं
              ये जाने वाले?

ये जाने वाले....!

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें