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ISSN 2292-9754

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06.01.2017


पहन के कोट पेंट

पहन के कोट पेंट तन पे लगा के सेंट,
बनकर बाबू सा में चला ससुराल को।

आकर के मेरे पास बोलने लगी ये सास,
नज़र न लग जाये कहीं मेरे लाल को।

बिलकुल हीरो से तुम लगते हो जीजा जी,
बोलने लगी सालियाँ खींच मेरे गाल को।

आख़िर है क्या राज़ बदले इसके मिज़ाज,
लग गए है बड़े भाग इस कंगाल को।


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