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ISSN 2292-9754

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04.22.2017


महबूबा

सबकी मेहबूबा है वो सबके दिल की रानी है।
मेरी गली के लड़कों पे जबसे आई जवानी है।

कभी कभी लगती मुझको वो सब तालों की चाबी है।
और जिससे पूछो वो ही कहता भैया तेरी भाभी है।

जब अपनी सखियों के संग जाती वो बाज़ार है।
ऐसे ख़ुश होते हैं सारे जैसे कोई त्यौहार है।

किसी के दिल को चैन नहीं है सबकी नींद चुरायी है।
किसी को लगती रसगुल्ला तो किसी को बालूशाही है।

गली के सारे लड़कों का ऐसा हाल कर डाला है।
सब जन्मों के प्यासे हैं वो अमृत का प्याला है।

कॉलेज का क्या हाल सुनाऊँ सब जगह उसका चर्चा है।
और महँगाई की तरह बढ़ रहा लड़को का अब ख़र्चा है।

अम्बर पूरे हो पाएँगे क्या उनके मनसूबे हैं।
कॉलेज के सारे लड़के ही अब कर्ज़े में डूबे हैं।


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