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ISSN 2292-9754

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04.22.2017


बसंत है आया

कू-कू करती कोयल कहती
सर सर करती पवन है बहती।
फूलों पर भँवरें मँडराते
सब मिल गीत ख़ुशी के गाते।


सबको ही ये मौसम भाया
देखो देखो बसंत है आया।

पेड़ों पर बेरी पक आई
खेतों में फसलें लहराई।
लदी हुईं फूलों से डाली
देख तितलियाँ हुई मतवाली।


भँवरों का भी मन मचलाया
देखो देखो बसंत है आया।

पड़े बाग़ बासंती झूले
बच्चे फिरते फूले फूले।
झूम झूमकर झूला झूलें
साँझ ढली घर जाना भूले।
सरपट सरपट दौड़े सारे


वायु का भी वेग लजाया।
देखो देखो बसंत है आया।


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