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ISSN 2292-9754

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03.17.2017


जान के नाम

तुम जो मेरे शाने पे रख देती हो हाथ अपना
गोया मुझे पे एक ज़िन्दगी मेहरबान हुई जाती है,
हर साँस महकने लगती है फूल बनकर
हर ख़ुशबू मेरे दिल की ज़बान हुई जाती है,
जब तुम रख देती हो मेरे अधरों पे थरथराते लब अपने,
मेरी हर ख़्वाहिश जवान हुई जाती है,
गिरूँ जो लड़खड़ा कर तो थाम लेना मुझको,
मेरी तमन्नाओं की ज़मीं, आसमान हुई जाती है,
तुम्हे क़सम है इक पल भी अकेला न छोड़ना मुझको,
तन्हाई में घबराता है जी, तबीयत परेशान हुई जाती है,
राह में निकला ना करोड खोल कर गेसू अपने,
भरी दोपहर में अँधेरा देखकर दुनिया हैरान हुई जाती है,
मत पूछो मुझसे मुहब्बत के अजाब ऐ दोस्त,
मेरी जान की दुश्मन अब मेरी जान हुई जाती है।


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