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| 06.26.2007 |
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तेरे दर पे वो आ ही जाते हैं |
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तेरे दर पे वो आ ही जाते हैं
आज इतनी पिला दे आँखों से
हल्का हल्का सुरूर है साक़ी
तेरी आँखें किसी को क्या देंगी
तेरी आँखों को कर दिया सजदा
तेरे रुख़ पे ये परेशां ज़ुल्फें
पीने वालों को भी नहीं मालूम |
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