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| 06.26.2007 |
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सूरज की हर किरन तेरी सूरत पे वार दूँ |
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सूरज की हर किरन तेरी सूरत पे वार दूँ
इतनी सी है तसल्ली कि होगा मुक़ाबला
इक ख़्वाब था जो देख लिया नींद में कभी
‘अदम‘ हसीन नींद मिलेगी कहाँ मुझे |
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