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| 05.28.2007 |
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साग़र से लब लगा के बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी
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साग़र से लब लगा के बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी
आ जाओ और भी ज़रा नज़दीक जान-ए-मन
होता कोई महल भी तो क्या पूछते हो फिर
महल=अवसर या अक्सर (द्विअर्थीय शब्द)
साहिल पे भी तो इतनी शगुफ़्ता
रविश है
साहिल=किनारा; शगुफ़ता=ताज़ा
वीरान दिल है और
‘ज़िन्दगी‘ का रक़्स
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