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| 04.28.2007 |
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ऐ मैगुसारों सवेरे सवेरे |
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ऐ मैगुसारों सवेरे सवेरे मैगुसारों=शराबियों: ख़्रराबात=मदिरालय
बड़ी रोशनी बख़्शते हैं नज़र को
किसी दिन इधर से गुज़र कर तो देखो
ग़म-ए-ज़िन्दगी को “अदम”
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