अब्बास रज़ा अलवी


कविता
अपने शहर की एक सोई हुई आवाज़
छोटी सी बिगड़ी बात को...
पुराने दोस्त
फूलों का आँगन
फ़िसादो दर्द और दहशत में
मैं भ्रष्टाचार मिटाऊँगा
रंगीन पतंगें