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| 05.28.2007 |
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तड़पते हैं ना रोते हैं ना
हम फ़रियाद करते हैं |
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तड़पते हैं ना रोते हैं ना हम फ़रियाद करते हैं
उन्हीं के इश्क़ में हम नाला-औ-फ़रियाद करते हैं
नाला=ऊँचे स्वर में रोना
शबे फ़ुर्क़त में क्या सांप लहराते हैं सीने पर
शबे फ़ुर्क़त=विरह की रात; काकुल-ए-पीछां=घुंघराले बाल |
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