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| 05.28.2007 |
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सुन तो सही जहां में है तेरा
फ़साना क्या |
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ख़ल्क-ए-ख़ुदा=भगवान की सृष्टि; ग़ैबाना=अदृश्य, छिपा हुआ, परोक्ष
ज़ीना सबा का ढूँढती है अपनी मुश्त-ए-ख़ाक
ज़ीना= सीढ़ी; सबा=कोमल हवा; मुश्त-ए-ख़ाक=मुट्ठी भर राख
कब्ज़-ए-रूह=आत्मा का नियन्त्रण
बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-अज़ीम
अज़ीम=महान |
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