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04.14.2007
 
मन के भाव
आस्था

मन के भाव
संस्कार की
देहलीज़
पर अटके हुए
भक्ति से भरे हुए
बहुत ही पावन।
धर्म के नियमों
में बंधकर
मर्यादा का उल्लंघन
करे बिना ही
मन ही मन
उमड़ उमड़ कर
रिश्ते की
पवित्रता को
और और और
बढ़ाते
ये मन के भाव।
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