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05.10.2008

कविता

अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , म, , , , , श-ष, , , क्ष, त्र, ज्ञ, , श्र-श्रृ  --  क्षणिकाएँ

पुस्तकें    
अन्तर्यात्रा राग-संवेदन मनोव्यथा
तारों के गीत हँस-हँस गाने गाएँ हम ! चंदन पानी
     
अ-आ  इ-ई उ-ऊ
अंग्रेज़ भोजन माँगेगा
अंतर्नाद
अंतिम गीत लिखे जाता हूँ
अँधेरा
अन्तर
अन्ततः
अंतरंग
अन्तरात्मा
अन्तर्यात्रा
अंधकार
अन्त्येष्टि - कुछ भाव
अन्वेषण
अकेलापन
अक्ल दाढ़
अग्नि रेखा
अक्षर
अक्षर और चेहरा
अचानक (नेहा)
अचानक (मुकेश पोपली)
अचेतन
अच्छा नहीं है लगता
अच्छाई और बुराई
अर्चना के पुष्प

अजीब बात
अज्ज आखाँ वारस शाह नूँ

अटूट सत्
अतिचार
अतीत

अतीत क्या हुआ व्यतीत

अथक
अदेह
अधिकार और समर्पण
अधूरा मिलन
अनचाही ज़िन्दगी
अनचाहे खेल
अनन्त महाभारत
अनभूले तुम
अनसुनी कर दो हर वह दस्तक़
अनुत्तरित प्रश्
अनुपमा
अनुभूति (डॉ. रमा द्विवेदी)
अनुभूति (डॉ. महेन्द्र भटनागर)
अनुभूति (डॉ. डीप्ति गुप्ता)
अनुभूति (शशि पाधा)
अनुराग
अनुरोध
अनुल्लिखित

अपना देश अपना गाँव

अपना नहीं कोई है

अपनी ज़िन्दगी
अपने अपने दायित्व
अपने शहर की एक सोई हुई

अपने हृदय की ओर

अपहर्ता
अपाहिज व्यथा
अपाहिज
अपेक्षा
अबद्ध
अभ्यास
अभिनन्दन (संदीप त्यागी)
अभिनन्दन (वीणा विज ’उदित’)
अभिलाषा
अभिवादन
अभिशप्त
अभी मत बोलो
अमरबेल
अमरीका, खुली हवा में
अमावस को हरने फिर ...
अय शहीद, तुझे सलाम
अलाव
अवधूत
अवमूल्यन
अवशेष
अविष्कार
अश्रु
अश्रु-नीर

अश्रु-सरिता के किनारे
असंतोष के सिंह तुम ...
असगरी बाई की आवाज़
अस्मिता खो गई

अस्मृति

अस्तित्व (अजन्ता शर्मा)

अस्तित्व (रंजना भाटिया)

अहसास

अहसास (सरिता मेहता)
अहसास
(रंजू भाटिया)
अहसासों की नदी
आँकड़े
आँखें

आँसुओं का खजाना
आ गया मधुमास
आ रहा है गाँधी फिर से
आओ जन्मदिन मनाएँ ...
आईना
आप जिसकी अनुमति दें
आत्मबल
आत्मा
आकांक्षा
आज कोई तो फैसला होगा
आज जब गूँगा हृदय है, ...
आज फिर
आज फिर ढलने लगी है शाम
आज भी शाम हो गई
आने वाला कल देखो
आशंकित शहर
आँसू पी लिए

आयी होली आयी
आप
आप - अंतराल के बाद
आप उपवन में आए
आप चाँदनी
आप-फिर एक बार
आपकी याद
आम बात
आयत और श्लोक
आवर्तन
आवाज़
आवाज़
आशंकित शहर
आशान्वित
आसक्ति
आस्था
आस्था और विश्वास.......
आस्था का
आस्था घुल रही आज ..
आह्लाद
इंतज़ार
इंतजार की घड़ी
इबारत
इस गँवार को !
इस बार
इस पार - उस पार
इसीलिये मैं मौन रह गया
ई-मेल
ईमान को क्या....

उजाले
उजाला छिन न पाएगा
उड़ान
उत्तर सारे मौन रह गये
उद्‌बोधन:आध्यात्मिक
उदासीनता
उधेड़ बुन
उन्मुक्त
उन्मुक्त तरंग
उन दिनों
उपसंहार
उम्मीद
उलझन (रंजना भाटिया)
लझन (रंजना भाटिया)
उलझन (श्यामल सुमन)
उलझन (श्वेता सुधांशु)
उल्लंघन
उस छूट्टी पर!
उसके लिये भी....
उसको देखना चाहूँ
उसने कहा था
उसमें सब कुछ था
ऊँचाई

   

-ऊपर

ए-ऐ ओ-औ
एक अहसास
एक आश्रम अशान्त
एक और संवाद
एक औसत रात: एक औसत दिन
एक चिंगारी
एक नया विश्वास
एक बीज
एक वह प्रस्तावना हो
एक प्रेमलता कुम्हलाई सी
एक बूँद हँसी की
एक बौनी बूँद
एक भारतीय पत्र मित्र इनद के नाम
एक भी खिड़की नहीं
एक मीठे गीत-सी तुम
एक छोटी-सी सोच
एक बच्चे की हँसी
एक बोल
एक विक्षिप्त औरत

एक संवाद
एक सीप, एक मोती
एक स्पर्श
एडवांस
हसा
एहसास (प्रतिमा भारती)
ऐ दोस्त क्या बताऊँ तुझे!
ऐंटी सेक्युसल हैरेसमेंट कमेटी
एक युग
एक ज़रूरी प्रार्थना

एक अहसास
ऐ रात संभल कर चल ज़रा










ओ अपरिचित ! आओ हम तुम
ओ पिया ओ पिया
ओ मेरे प्राणेश-नहीं है कुछ भी
ओ भारत देश महान मेरे
ओ राही
ओ हिम धीरे से गिर
ओस्लो में 20 नवम्बर
ओ भँवर
ओ ख़ुदा
ओ मसीहा
ओ राही
और
...और बातें हो जायेंगी
औरत नियति सी
कंधों पर सूरज
कब से रही पुकार
कभी
कभी पूछा है ख़ुद से
कन्यादान
कटे पेड़ के पास
कठिन पल
कभी चले थे साथ-साथ
कमाल की लाईन है
करती है पानी-पानी
कलयुग की मार
कविता पुरानी
कर्ज़ का तक़ाज़ा
कर्मफल
कर्मठ गधा
कल
कल्पना
कल्पना के चित्र मेरे
कवच
कवि अपना कर्तव्य निभा तूँ
कविता (डॉ. भारतेन्दु श्रीवास्तव)
कविता (महावीर शर्मा)
कविता (मीना चोपड़ा)
कविता
(सुदर्शन रत्नाकर)
कविता जम गई है-सर्दी का..
कविते!
कविते! तू आयी
कसक
कसक (श्यामल सुमन)
कसबे की साँझ

कहाँ हैं वो लोग
कहानीकार
क्यों न कहो मैं गीत सुनाऊँ
काँटा
काँटों से सेवित है मानवता..,
काँपती किरनें
कामना
कामना (पाराशर गौड़)
कामना (श्यामल सुमन)
काश (दिव्या माथुर)
काश (दिविक रमेश)
काश
(किरण सिंह)
काश हृदय पत्थर का होता
काल का बिकराल रूप
काला चाँद
कितना मुश्किल है
कितने गीत और लिखने हैं
किताब
किताबें
किस ओर चलूँ मैं
किस छाँह तले बिखरा गजरा
किससे माँगें अपनी पहचान
किसलिये मैं गीत गाऊँ
कीचड़ में कमल
कुछ अनकही सी...
कुछ तो गाओ
कुछ पता भी न चला
कुछ मंदिरों के अंदर
कुत्ता! बापू की समाधि जा चढ़ा
कुलजीत की हार
कुहासा
केवल तुम हो
कैनवस
कैद
कैद प्यार
कैसे मैं दिल को दिलासा दिलाऊँ
कैसे मैं समझाऊँ
कैसे लाँघी- मर्यादा?
कोई तो जीवित है
कोई बात
कोशिश
कोयल
कोयला
कौन
कौन ये?
क्या हूँ  मैं?

क्यूँ

क्यों
क्यों करोगी पढ़ाई
क्या करूँगा
क्यों फैला है भ्रष्टाचार
क्या भूली??
क्यों ना जीवन से प्यार करूँ
   

-ऊपर

खंडहर
ख़त
ख़्वाहिशें
खाटप्रिया
ख़ामोश मन्दिर
खिलौना (शबनम शर्मा)
खिलौना
(श्यामल सुमन)
खुशी
खेद

खो गयी
खो चुका परिचय
ख़ौफ़
गंधाती सड़क
गणितज्ञ का प्यार
गरीबों का नया साल
गलती
गलती मत करना
ग्लोबल हुआ कार्य क्षेत्र
गिरगिट
गिरगिट के अब्बा श्री
गीत
गीत खुशी के
गीत गाऊँ आज बोलो
गीत की चाहत
गीत तो हमने लिखे हैं ...
गीत बनने से पहले ...
गीत बहुत बन जाएँगे
गीत मैं गढ़ता रहा हूँ
गीली मिट्टी
ग्रीष्म पर कुण्डलियाँ
गुड़ गोबर
गुनगुनाया हमें
धूप गुनगुनी
गुर्खा फोर्ट की हाइक
गुर्दा
गुलमोहर
गुलाम
गुलाम देश का मजदूर गीत
गूँज
गेहूँ
गैया
गोकुल आवाज़ें देता है
घट का आकाश
घट का यौवन
घाटी में धूप

घर
   

-ऊपर

चन्द आँसू, चन्द हँसी की फुहारें
चन्दन लेप लगाया किसने
चक दे ट्वंटी ट्वंटी
चढ़ता सूरज
चरित्र
चले आओ
चयन
चर्चा
चलते चलते जब थक जाऊँगा
चलोगी! मेरे साथ तुम
चाँदनी की उधारी
चाँदनी मुस्कुराते हुए चुप रही
चाँदनी चेहरा छुपाने लगी
चाँदनी रात के
चातक सा मन
चालू नम्बर वन
चार मुक्तक
चाह — ?
चाहत (प्रतिमा भारती)
चाहत (श्यामल सुमन)
चाहे कितने दीप जलाना
चिन्ता
चितवन किरन गोरिया चाँदनी ..
चितेरे बोल
चित्र मावस का
चित्रों से दोस्ती
चिड़िया का वादा
चिर-वंचित
चीं भैया चीं
चीड़
चुनरी
चुनाव की चाह
चुनाव अभियान
चूल्हा
चेतावनी
चोट
चौराहा
छब्बीस जनवरी

छब्बीस जनवरी नया रंग...

छवि
छवि खो गई जो
छलके शब्दों की गागरिया
छाँव-निवासी
छाप
जंगल
जंगल का सागौन
जब जब आयेगा सावन
जन्म दे मुझे भी माँ
"जवाँ भिखारिन-सी"
जमाव
ज़रूरी तो नहीं
जरूरी है
जहाँ चाह, वहाँ राह
ज्योति
ज्योति के तीन शब्द-चित्र
जाइये-आइये
जानती हूँ मैं
जाना ही था तो ज़िंदगी में ...
जाने क्यों लगता है
जाया न करो
ज़िंदगी
ज़िन्दगी (क्षणिकाएँ)
ज़िन्दगी का सच
ज़िन्दगी का स्वेटर
ज़िन्दगी के रंग(महिमा भटनागर)
ज़िंदगी के रंग (रंजना भाटिया)
ज़िन्दगी को मज़ाक में लेकर

ज़िन्दगी प्रश्न करती रही

जिजीविषु
जिन के सिर पर होता कोहिनूर
जी चाहता है
जीत
जीने नहीं देते वो
जीवन्त
जीवन
जीवन (डॉ. दीप्ति गुप्ता)
जीवन का पड़ाव,...
जीवन का सच
जीवन की साँझ
जीवन के ये पल
जीवन क्या है?
जीवन मूल्यों में विप्लव हो
जीवन सार
जीवन है परेशान
जाने वाले
जाल
जुदाई (दीपा जोशी)
जुदाई (रंजू भटिया)
जेठ की दोपहर
जो चाहिये
जो चाहो तो
जोकर
जुगनू
   

-ऊपर

झक मारता हूँ
झंकार
झंकृत
झांसी की रानी लक्ष्मी बाई
झूठ
टपक रहीं हैं खपरैलें
ट्रैफिक-जाम

ठंडी सी छाँव

ठंडे लोग
ठूँठ
ठूँठ होते पहाड़
   

-ऊपर

डर
डाऊनिंग स्ट्रीट के दस नम्बरी..
डायल मी *माधव*
डेंगू से डेंगी 

 

ढीली पड़ती मुट्ठियाँ
ढूँढता हूँ जिन्दगी में ..
ढूँढता हूँ मैं तुम्हें ...

तन्हाई (समीर लाल ’समीर’)
तन्हाई (प्रो. राजकिशोर प्रसाद)
तन्हाई (सीमा गुप्ता)
तकलीफ़
तड़ित रश्मियाँ
तपती धरती
तब की बात
तम के बढ़ते साये
तमन्ना
तलाश...
तलाश (डॉ. दीप्ति गुप्ता)
तलाश (प्रकाश यादव निर्भीक)

ताज़ा हवा
तिनका ही जब छूट गया तो
तिलस्मी ताबीज़
तीन मुक्तक
तीर
तीसरे बन्दर का मतलब
तेरी मर्जी
तेरे जाने के बाद
तेरे प्यार को तब मैं सच मानूँ
तुम (राकेश खण्डेलवाल)
तुम.... (डॉ. महेंद्र भटनागर)
तुम न आये (राकेश खंडेलवाल)
तुम न आये (निर्भीक)
तुम पास तो आओ
तुम मेरे पास हो..
तुम लड़की...
तुम न होती तो..... ?
तुम मेरे लिए क्या हो
तुम होते तो
तुम्हारा आगोश
तुम्हारा प्यार
तुम्हारा संस्मरण
तुम्हारी कसम
तुम्हारी मुस्कान
तुम्हारे अस्तित्व की जननी...
तुम्हारे पास

तुम्हारे प्यार से
तुम्हारे फूल
तुम्हारे हाथ
तुम्हें गीत बन जाना होगा
तुलना
तुषार
तू जो साथ तो
तू कितना मेरे दिल के पास है
तू सबसे सुंदर है
तुम न आये
तुम्हारा पत्र
तेरे नाम लिखूँ
तैर रहे हैं गाँव
   

-ऊपर

थम सी गई पृथ्वी
थरथराती हुई उँगलियों से
थिरकन
दंभी
दरख़्तों के साये तले
दरवाजा खटखटाते सपने
दर्पण
दर्द दिल का
दस बूँदे
दादाजी
दिन
दिल का दर्द
दिल की बातें
दिल से
दिवाली
दिव्य मूर्ति
दिशाहीन
दीदार
दीप
दीप जलाने हों तो
दीप्ति ही तुम्हारी सौन्दर्यता है
दीपमाला
दीवाली (आशा बर्मन)
दीवाली
(डॉ.भारतेन्दु श्रीवास्तव)
दीपावली के अवसर पर
दीवाली मनाना है
दीपावली 2004
दीवाली संकल्प
दुख का दर्द
दुख विगलन
दुनिया की कल्पना
दुनिया बहुत आगे जा चुकी है...
दुल्हन
दूरत्व
दूरवर्ती से
दृष्टि
दॄष्टि के चुम्बन
देख लिया
देश : दस तेवरियाँ
दर्द का अहसास
दुनिया की कल्पना
दो चार पल
दो ध्रुव
दो पल
शब्द कहाँ से लाऊँ वो?
दो फूल
दोहरा जीवन जीते हैं हम
दोराहे पर जीता मन
दोहे (श्यामल सुमन)
दोहे (डॉ. राजेन्द्र गौतम)
द्वन्द्व

द्वापर-प्रसंग

धड़कनों पे धड़कनें
धरती का दुख
धुआँ
धूल भरी परत
धूप
धरती माँ
 

-ऊपर

न जाने क्या होगा
नई सदी के लोग
नए वर्ष का नया सवेरा
नए समीकरण
नए साल में क्या दूँ
नजर अपनी अपनी
नन्हा बच्चा
नदी (जयप्रकाश मानस)
नदी (रवीन्द्र प्रभात)
नयन - पीर
नयन बावरे गए आज भर
नया सबेरा
नयी नारी
नये पत्ते डाल पर आने लगे
नव वर्ष
नववर्ष (शबनम शर्मा)
नव वर्ष (राखी चन्दूक)
नव वर्ष (राकेश खण्डेलवाल)
नव वर्ष (रामेश्वर काम्बोज)
नव वर्ष (निर्मल सिद्धू)

नव वर्ष की मंगल बेला पर
नव वर्ष पर मुक्तक और शे’र
नव वर्ष प्रकाश
नया साल
नये वर्ष की शुभकामनाएँ
नवल वर्ष
नवल वर्ष की मंगल कामनाएँ
नवल सृजन
नशे बाज की यही कहानी
नहीं
नहीं बाँटते अब दर्द शब्द, ...
नाग 
नाम
नाम तुम्हारा आ जाता है
नाम मैंने लिखा प्रीत का
नारी (श्यामल सुमन)
नारी (डॉ. दीप्ति गुप्ता)
नारी (डॉ. महेंद्र भटनागर)

निगाहों के प्रश्
निजत्व
नित्य नये-नये रूपों में
निद्रा आ उन्हें फिर भेड़ती है
नियति
निरन्तरता
निवेदन
निशब्द फिर भी शब्द होते हैं
निशान छोड़ते प्रेत
निश्छल भाव
निष्कर्ष
निष्कर्ष (राग-संवेदन)
नींद के साथ शतरंज
नीर पीर
नीलकंठ
नीलकण्ठ तो मैं नहीं हूँ&nbs