कविता
अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श-ष, स, ह, क्ष, त्र, ज्ञ, ऋ, श्र-श्रृ -- क्षणिकाएँ
अजीब बात अज्ज आखाँ वारस शाह नूँ
अटक मत अटूट सत्य अतिचार अतीत अतीत क्या हुआ व्यतीत अथक अदेह अधिकार और समर्पण अधूरा अधूरा मिलन अनचाही ज़िन्दगी अनचाहे खेल अनन्त महाभारत अनभूले तुम अनमोल अनसुनी कर दो हर वह दस्तक़ अनामिका अनुत्तरित प्रश्न अनुपमा अनुभूति (डॉ. रमा द्विवेदी) अनुभूति (डॉ. महेन्द्र भटनागर) अनुभूति (डॉ. डीप्ति गुप्ता) अनुभूति (शशि पाधा) अनुराग अनुरोध अनुल्लिखित
अपना देश अपना गाँव
अपने हृदय की ओर अपनों के बीच भी कहाँ...
अस्मृति
अस्तित्व (रंजना भाटिया)
उजाले उजाला छिन न पाएगा उठो उड़ान उत्तर गुमनाम रहे उत्तर सारे मौन रह गये उद्बोधन:आध्यात्मिक उदास लड़की उदासीनता उधेड़ बुन उन दिनों उन्मुक्त उन्मुक्त तरंग उन्हें दर्द होता है उपसंहार उम्मीद (सुभाष चौधरी) उम्मीद (डॉ. ऋतु पल्लवी) उलझन (रंजना भाटिया) उलझन (रंजना भाटिया) उलझन (श्यामल सुमन) उलझन (श्वेता सुधांशु) उल्लंघन उस छूट्टी पर! उस पल यादों के पाखी उसके लिये भी.... उसको देखना चाहूँ उसने कहा था उसमें सब कुछ था ऊँचाई ऊब
-ऊपर
कील पुरानी है
क्यूँ क्यूँ सूरत तेरी मन भायी
छब्बीस जनवरी नया रंग...
ज़िन्दगी प्रश्न करती रही ज़िन्दगी बस बिलम्बित... ज़िन्दगी मोम बन कर ...
ठंडी सी छाँव
ढीली पड़ती मुट्ठियाँ ढूँढता हूँ जिन्दगी में .. ढूँढता हूँ मैं तुम्हें ...
द्वापर-प्रसंग
पगली
प्यार (रंजना भाटिया)
बाँसलोय में बहत्तर ऋतु बाँसुरी
मन, कितने पाप किए
मन के हाइकु मन तो बसता अपने देश
महुआ के फूलने के मौसम में
माँ अब
वक़्त वक़्त की शतरंज वक़्त की सेहरा
विदा-वेला
वृद्धा-पुराण
संभलते हैं सम्भावना का सपना संयम
समय का वरदान
साँस की कीमत चुकाएँ
साँस भर जी लो