अनूदित साहित्य |
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| अ-आ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, क, ख्, ग, घ, च, छ, ज, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श-ष, स, ह, क्ष, त्र, ज्ञ, ऋ, श्र-श्रृ, इ-ई, उ | ||||||
| अ-आ | इ-ई | उ-ऊ | ||||
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अज आखाँ वारस शाह नूँ अपने मठ की ओर -विशाल आम आदमी - डॉ. सुखपाल सिंह |
उदास वक्त में मैंने -सुरजीत पातर | |||||
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| ए-ऐ | ओ-औ | क | ||||
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कश्मीरी पंडितों के नाम कहाँ जाऊँ मैं - बशीर अतहर |
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| ख | ग | घ | ||||
| घोड़ा और बुज़ु़र्ग - बलबीर माधोपुरी | ||||||
| च | छ | ज | ||||
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उदास वक़्त में मैंने - सुरजीत पात्तर मेरी कविता - सुरजीत पात्तर |
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| झ | ट | ठ | ||||
| ड | ढ | त | ||||
| थ | द | ध | ||||
| न | प | फ | ||||
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नसल
- डॉ. सुखपाल सिंह नाथों का उत्सव -विशाल |
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| ब | भ | म | ||||
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माँ बताती है - बलबीर माधोपुरी |
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| य | र | ल | ||||
| रोशनी - अमृता प्रीतम | ||||||
| व | श-ष | स | ||||
| वह पौधा- डॉ. सुखपाल सिंह |
सिकुड़ता बिन्द
- बलबीर माधोपुरी सुराख़दार थाली - बशीर अतहर |
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| ह | क्ष | त्र | ||||
| हिलोर- डॉ. सुखपाल सिंह | ||||||
| ज्ञ | ऋ | श्र-श्रृ | ||||