संपादकीय - सदी का एक चौथाई भाग बीत गया
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
अधूरी देहरी का मौन
साँझ के झुटपुटे में माधव दालान की उस पुरानी आरामकुर्सी पर पसरा था जिसकी एक टाँग अरसे से हिल रही थी। घर के भीतर से खड़बड़ाहट की आवाज़ें आ रही थीं। उसकी बड़ी बेटी विभा अपना बोरिया-बिस्तर समेट रही आगे पढ़ें
अवार्ड का राज़
पूरे ऑफ़िस में चर्चायें आरंभ हो गई थीं कि इस साल बेस्ट परफ़ॉर्मेन्स का अवार्ड किसे मिलेगा? बात सिर्फ़ अवार्ड की नहीं थी, उसके साथ प्रमोशन भी तो जुड़ा था। हर कोई जुगत लगाने में लगा था कि किसी आगे पढ़ें
घाणी का बैल
“आज तुझे कैसे फ़ुर्सत मिल गई?” मीता! “तुझसे मिलने का मन किया तो आ गयी।” “अच्छा! आ बैठ,” काजल सनेह-भरे स्वर में बोली। 'पहले यह बता, तेरे चेहरे का रंग उड़ा-उड़ा क्यों है?” “कहाँ? सही तो हूँ।” “आईने मैं आगे पढ़ें
छूटी हुई पाठशाला
मिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह-सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी-सी लड़की आज फिर घर की देहरी पर रुक गई। उसका नीला-सा फीका पड़ चुका स्कूल-फ्रॉक, जैसे हर रोज़ उससे पूछता हो—“चलें?” और चौखट पर आगे पढ़ें
जीवन संग्राम
यह कहानी वर्तमान समय के उस संक्रमण काल की है, जहाँ दो पीढ़ियों के संस्कार, जीवन-मूल्य और आकांक्षाएँ एक-दूसरे के सम्मुख किसी महायुद्ध की भाँति खड़ी हैं। यह केवल एक पिता और पुत्री का विवाद नहीं, बल्कि पुरातन जड़ों आगे पढ़ें
ढलती साँझ . . .
जाड़े के दिन! घाटियों में घना कोहरा, एक मीटर भी देखने की गुंजाइश नहीं! लेकिन रोहित इस घने कोहरे में भी सुबह दौड़ने ज़रूर जाता। भारतीय सेना में भर्ती होने की ख़्वाहिश उसकी चट्टान सदृश थी, जिसे कोई तोड़ आगे पढ़ें
मुर्दा दिल
इंदिरा की बीमारी का नाम हमें बाद में पता चला था। एक्यूट लिम्फ़ोसाएटिक ल्यूकीमिया। लेकिन उस के तीसरे गर्भपात के दिन ही से माँ और मैं अपने घर-द्वार के लिए एक नवेली चाहने लगे थे। बीमारी का नाम उद्घाटित आगे पढ़ें
मेरी वाटिका—मेरा सुकून
शहर की व्यस्त सड़क से कुछ ही क़दम की दूरी पर, राज का घर, शान्ति का टापू था। राज के घर का आकर्षण थी—एक छोटी सी वाटिका, जिसे उन्होंने पिछले लगभग 8 वर्षों से सिर्फ़ पानी से नहीं, बल्कि आगे पढ़ें
रोहन और ग़ुस्से वाला राक्षस
एक व्यस्त से महल्ले में रोहन नाम का एक प्यारा-सा लड़का रहता था। रोहन की आँखें चमकीली थीं और मुस्कान बहुत मीठी, लेकिन उसके पास एक बड़ा-सा, गुप्त-सा मुद्दा था। उसके पेट के अंदर एक बहुत बड़ा, आग जैसा आगे पढ़ें
सबको मार दिया
बरसों बाद कॉलेज की दो सहेलियों की संयोग से मुलाक़ात हुई तो . . . “कैसी है री? रानी!” “ठीक हूँ।” “बुझी-बुझी लग रही हो मुझे तो, अवश्य कोई तो बात है।” “जब से सब को मार दिया मैंने, आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
इस साल के अंत का सूत्र: वन नेशन, वन पार्टी
“यह चालू साल ख़त्म होने वाला है और नया साल शुरू हो रहा है तो क्या हमें कोई घोषणा करनी चाहिए?” एक नेता ने पूछा। बिना झिझक झूला झूलते हुए दूसरे नेताजी बोले, “अरे इसमें क्या है? जब से आगे पढ़ें
गए ज़ख़्म जाग, मेरे सीने में आग, लगी साँस-साँस तपने . . .
प्रेम का न कोई कारण होता है न कोई मारक। प्रेम का कोई मरण भी नहीं, प्रेम तो बस स्मरण होता है। “मैं बिस्तर पर सोया रहूँगा, ऐसा दिखाऊँगा जैसे मौत दरवाज़े पर दस्तक दे रही हो। मेरी आख़िरी आगे पढ़ें
चला गधा आदमी बनने
ऑफ़िस जाते-जाते भले ही लंच ले जाना भूल जाऊँ तो भूल जाऊँ, पर मंदिर के पास से जाना नहीं भूलता। आप सोच रहे होंगे कि मैं मंदिर से होकर जाते हुए भगवान के दर्शन करता जाता होऊँगा ताकि मेरा आगे पढ़ें
चूहों के अस्पताल
इस समय सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों की आवाजाही कम, चूहों की ज़्यादा दिख रही है। मरीज़ को पर्ची कटवा लाईन में आना पड़ता है पर चूहा बिना पर्ची, बिन लाईन के सीधे प्रवेश कर जाता है। चूहे ‘शायद अस्पताल आगे पढ़ें
डर का सेल काउंटर
आइए . . . आइए . . . ज़रा इधर आइए भैया . . . ए जाने वाले तेरा ध्यान किधर है, डर का सेल काउंटर इधर है डर का ग्रैंड सेल लगा है बाबू। सीज़नल नहीं—परमानेंट लगा है बाबू। आगे पढ़ें
श्रीलंकाई बहू और सर्दियों की धूप
यह एक श्रीलंकाई बहू की नज़र से भारतीय सर्दी और धूप के साथ हुए उसके प्यारे हल्के-फुल्के रिश्ते की कहानी है। जहाँ ठंड है, हँसी है और धूप में बैठकर ज़िंदगी को समझने की एक छोटी-सी कोशिश भी और आगे पढ़ें
सब चंगा सी
हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफ़ी उथल-पुथल देखी। अब क्रिकेट में सिर्फ़ एक ही चीज़ स्थायी है वह है भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबले में पाकिस्तान की हार। भले ही मैच किसी भी फ़ॉर्मैट और किसी आगे पढ़ें
आलेख
अटल के सपनों का भारत
भारत के आधुनिक इतिहास में यदि किसी राजनेता को कवि–हृदय, दार्शनिक दृष्टि और राष्ट्र–निर्माण की दूरदृष्टि का अद्भुत संगम कहा जाए, तो वह नाम अटल बिहारी वाजपेयी का है। वे केवल सत्ता के शिखर पर आसीन एक प्रधानमंत्री नहीं आगे पढ़ें
गोस्वामी तुलसीदास की धर्मपत्नी रत्नावली का विरही काव्य
गुसाईं तुलसीदास अपनी राममय भगवद्भक्ति, लोकोपकारिता और रामचरित्र मानस व काव्यरस रचनाओं के कारण समूचे विश्व में स्मरणीय है किन्तु उनकी धर्मपत्नी रत्नावली, जो वास्तव में परम विदुषी थी तपस्विनी होने के साथ-साथ पति वियोग में कवयित्री बन गई आगे पढ़ें
नए वर्ष का संकल्प: दुख की शिकायत लेकर मत चलिए
भूल जाने योग्य अतीत को स्मृति के पिटारे में बंद कर दीजिए: विस्मृति भी एक गुण है नया वर्ष समस्त पृथ्वीवासियों का सामूहिक जन्मदिन मानकर मनाया जाना चाहिए। जैसे चेकबुक से एक-एक चेक निकालते समय हम कितनी सावधानी आगे पढ़ें
नया वर्ष कैलेंडर का पन्ना नहीं, आत्ममंथन का अवसर
नया वर्ष आते ही समय जैसे एक नई चादर ओढ़ लेता है। दीवारों पर टँगे कैलेंडर बदल जाते हैं, मोबाइल की स्क्रीन पर तारीख़ नई हो जाती है और हम सब एक दूसरे को शुभकामनाएँ देने लगते हैं। पर आगे पढ़ें
नववर्ष की पूर्व संध्या पर
सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने। लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्॥ जैसे सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, फूल हमेशा महकता रहता है। इसी तरह, नया साल आपके लिए हर दिन, हर पल मंगलमय हो। नए आगे पढ़ें
रिश्तों की दरारें और सोशल मीडिया का अदृश्य हाथ
क्या एल्गोरिद्म हमारी नज़दीकियाँ खा रहे हैं? हम अक्सर दिल के उन अनकहे कोनों में झाँकते हैं, जहाँ जीवन अपने असली रंगों में दिखाई देता है। यह विषय भी कुछ ऐसा ही है, नर्म, नाज़ुक, पर बेहद ज़रूरी। क्योंकि आगे पढ़ें
लोक-मानस की अक्षय निधि हैं हमारी लोकोक्तियाँ
जब भी मैं भाषा के स्वरूप और उसकी जीवंतता पर विचार करता हूँ, तो बार-बार यह अनुभव करता हूँ कि किसी समाज की वास्तविक पहचान उसकी शब्दावली से अधिक उसकी लोकोक्तियों में सुरक्षित रहती है। भाषा यदि देह है, आगे पढ़ें
वर्षांत का साहित्यिक बही-खाता
वर्ष के अंतिम दिनों में साहित्यिक संसार में एक विशेष क़िस्म की प्रायोजित गतिविधि दिखाई देने लगती है। कुछ पत्र–पत्रिकाएँ, विशेषतः वे जिनका स्वरूप साहित्यिक कम और व्यवसायिक अधिक हैं, ‘वर्ष की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें’, ‘वर्ष के चर्चित लेखक’, आगे पढ़ें
शाखा जब वृक्ष से अलग हो जाये
एक हरे-भरे, फलते-फूलते किसी पुरातन वृक्ष की शाखाएँ भी निश्चित रूप से वैसी ही होती हैं। परन्तु यदि कोई शाखा अपने जन्मदाता अर्थात् उस वृक्ष से अलग हो जाये, तो? इस प्रश्न का उत्तर एक बालक भी सहज भाव आगे पढ़ें
समकालीन कथा-साहित्य 2025: एक सिंहावलोकन
समकालीन हिंदी कथा साहित्य समाज और जीवन के बदलते यथार्थ का सजीव दर्पण है। समकालीन कथाकारों ने पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों में हो रहे तनाव, विघटन और जटिलताओं को गहराई और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया है। वे आगे पढ़ें
समकालीन हिंदी कविता 2025: एक सिंहावलोकन
समकालीन हिंदी कविता की मूल पहचान जनपक्षधरता और सामाजिक बोध है। यह कविता मानव जीवन को उसकी सम्पूर्णता में स्वीकार कर सत्ता, अस्मिता और लोकतंत्र से जुड़े प्रश्नों पर सक्रिय हस्तक्षेप करती है। समकालीन हिंदी कविता अपने समय, समाज आगे पढ़ें
समीक्षा
कविताएँ, जो केवल ‘बोलती’, ही नहीं, बल्कि ‘काटती’, भी हैं . . .
पुस्तक: खतरे में कुर्सी (कविता संग्रह) कवि: बलविंद्र सिंह ‘बलि’, (कला प्राध्यापक, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली) प्रकाशक: पुष्पांजलि प्रकाशन, दिल्ली–110053 मूल्य: ₹495/- कविताएँ: 62 पृष्ठ: 160 बलविंद्र सिंह ‘बलि’, का कविता संग्रह ’,खतरे में कुर्सी’, समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य आगे पढ़ें
पैमाने नये आये: अवाम की आवाज़ से निकली हुई ग़ज़ल
पैमाने नये आये ग़ज़ल संग्रह अशोक कुमार नीरद वर्ष-2025, मूल्य-375/- लिटिल बर्ड पब्लिकेशंस, नयी दिल्ली हिंदी ग़ज़ल परंपरा में कई रचनाकार ऐसे हैं, जो मूलतः दूसरी विधाओं में रहकर हिंदी ग़ज़ल में आए हैं। उसमें भी वो रचनाकार आगे पढ़ें
संस्मरण
सीख देता प्रसंग
सत्रह दिसंबर 2025 के दिन मुझे सपत्नीक सैन डिएगो से अलास्का एयरलाइन से सान होजे आना था। मैंने अपनी आदत के अनुसार अपना तीन पीस का सूट पहना और बैग में मौजूद डॉलर्स से दो सौ बीस डॉलर अपने आगे पढ़ें
अन्य
सर्वश्रेष्ठ पाठक के नाम एक पत्र
प्यारे हांडा अंकल सादर नमन! आशा है, आप अपने नए रंग-रूप के साथ अपनी नई दुनिया में आनंदित होंगे। आपकी यह नई यात्रा इतनी शांति-भरी थी मानो यात्रा के लिए आप महीनों पूर्व मन को तैयार किए बैठे हों। आगे पढ़ें
कविताएँ
शायरी
समाचार
साहित्य जगत - विदेश
ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..
मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…
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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह
दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…
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हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा द्वारा आयोजित ‘राम तुम्हारे अनंत..
हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा द्वारा रामनवमी के पावन अवसर पर ‘राम तुम्हारे अनंत आयाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
डॉ. रमा द्विवेदी ‘साहित्य अर्चन मंच' द्वारा पुरस्कृत
साहित्य अर्चन मंच, नागपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह 8 नवम्बर-2025 विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मलेन के सभागार में संपन्न…
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डॉ. रमा द्विवेदी ‘देवेंद्र शर्मा स्मृति मुंशी प्रेमचंद..
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच का 12वाँ अखिल भारतीय साहित्योत्सव 2 नवम्बर 2025 पब्लिक लाइब्रेरी, दिल्ली के गीतांजलि सभागार में…
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‘प्रोफेसर पूरन चंद टंडन अनुवाद साहित्यश्री पुरस्कार’ से..
दिनेश कुमार माली की ‘दिग्गज साहित्यकारों से सारस्वत आलाप‘ एवं ‘शहीद बीका नाएक की खोज‘ पुस्तकों का हुआ विमोचन …
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
‘क से कविता’ का बाल-कविता समारोह संपन्न
बाल-दिवस-विशेष: हैदराबाद, 13 नवंबर, 2025। हिंदी-उर्दू कविता को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित संस्था “क से कविता”…
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पुस्तकों द्वारा स्वस्थ समाज का निर्माण—इंदिरा मोहन
नई दिल्ली। “साहित्य सदैव मनुष्य को संस्कार देता आया है, उसे सही मार्ग दिखाता आया है। वास्तव में पुस्तकों…
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कुछ राब्ता है तुमसे—राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
हैदराबाद, 8 अक्टूबर, 2025। मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के गच्ची बावली स्थित दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के…
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